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ओ मेरी जाँ - O Meri Jaan (K.K., Life In A Metro)

| Wednesday, August 22, 2012 |

Movie/Album: लाइफ इन अ मेट्रो (2007)
Music By: प्रीतम चक्रबर्ती
Lyrics By: सईद कादरी
Performed By: के.के.

दिल खुदगर्ज़ है
फ़िसला है ये, फ़िर हाथ से
कल उसका रहा, अब है तेरा
इस रात से
ओ मेरी जाँ

तू आ गया यूँ नज़र में
जैसे सुबह दोपहर में
मदहोशी यूँ ही नहीं
दिल पे छाई
नियत ने ली अंगड़ाई
छुआ तूने, कुछ इस तरह
बदली फ़िज़ा, बदला समां
ओ मेरी जाँ...

नाता समझे ना हाँ ये दिल मेरा
जानूँ ना, जानूँ ना इसको क्या हुआ
मेरी बाहों की फिर से ढूंढे ये पनाह
तू है कहाँ, तू है कहाँ
ओ मेरी जाँ...
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रिश्ते - Rishtey (James, Life In A Metro)

| Monday, August 20, 2012 |

Movie/Album: लाइफ इन अ मेट्रो (2007)
Music By: प्रीतम चक्रबोर्ती
Lyrics By: सईद कादरी
Performed By: जेम्स

रिश्ते तो नही रिश्तों की, परछाईयाँ मिले
ये कैसी भीड़ है बस यहाँ, तन्हाईयाँ मिले

इक छत के तले अजनबी हो जाते हैं रिश्ते
बिस्तर पे चादरों से चुप सो जाते हैं रिश्ते
ढूँढे से भी इनमें नहीं गरमाईयाँ मिले
ये कैसी भीड़...

जिसको भी देखिए वो अधूरा सा है यहाँ
जैसे कहीं हो और वो आधा रखा हुआ
वो जब जहाँ जुड़े वहीँ जुदाईयाँ मिले
ये कैसी भीड़...
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बातें कुछ अनकही सी - Baatein Kuch Ankahi Si (Adnan Sami, Life In A Metro)

| Sunday, August 19, 2012 |

Movie/Album: लाईफ इन अ मेट्रो (2007)
Lyrics By: सईद क़ादरी
Music By: प्रीतम चक्रोबर्ती
Performed By: अदनान सामी

बातें कुछ अनकही सी, कुछ अनसुनी सी, होने लगी
काबू दिल पे रहा ना, हस्ती हमारी खोने लगी
शायद यही है प्यार

कह दे मुझसे दिल में क्या है
ऐसा भी क्या गुरूर
तुझको भी तो हो रहा है
थोड़ा असर ज़रूर
ये खामोशी जीने ना दे
कोई तो बात हो
शायद यही है प्यार...

तू ही मेरी रोशनी है
तू ही चिराग है
धीरे-धीरे मिट जाएगा
हल्का सा दाग है
ये ज़हर भी यूँ पीया है
जैसे शराब हो
शायद यही है प्यार...
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