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तू ही मेरा - Tu Hi Mera (Jannat 2, Shafqat Amanat Ali Khan)

| Sunday, August 12, 2012 |

Movie/Album: जन्नत 2 (2012)
Music By: प्रीतम चक्रबर्ती
Lyrics By: सईद कादरी
Performed By: शफ़कत अमानत अली खान

तेरे इश्क में डूबा रहे, दिन रात यूँ ही सदा
मेरे ख्वाब से आँखें तेरी, इक पल ना होए जुदा
मेरा नाम तू हाथों पे अपने, लिखे बार हाँ
ऐ काश के ऐसा भी इक दिन, लाये वो खुदा
तू ही मेरा मेरा मेरा

है तेरी चाहत, मेरी ज़रुरत
सूनी है तुझ बिन, दुनिया मेरी
ना रह सकूंगा, मैं दूर इनसे
है मेरी जन्नत, गलियां तेरी
उम्मीद ये सीने में लेके, मैं हूँ जी रहा
कभी तू मिले मुझसे कहे, के मैं हूँ बस तेरा
तू ही मेरा मेरा...

तू है किस्मत, तू ही है रहमत
तुझसे ही जुड़ी है, मेरी हर ख़ुशी
तू ही मोहब्बत, तू ही है राहत
लगती भली है, तेरी सादगी
पाता हूँ खुद को हर घड़ी, तेरे बिना तन्हां
मुझे थाम ले, मुझे रोक ले
भटका हूँ, मैं भटका
तू ही मेरा...
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जन्नतें कहाँ - Jannatein Kahan (KK, Nikhil D'Souza, Jannat 2)

| Monday, June 4, 2012 |

Movie/Album: जन्नत 2 (2012)
Music By: प्रीतम चक्रबर्ती
Lyrics By: सईद कादरी
Performed By: के.के., निखिल डी'सूज़ा

ज़रा सा, ज़रा सा
लगे तू खफ़ा सा
ज़रा सा, ज़रा सा
गिला बेवजह सा
तेरे ही लिए, तुझसे हूँ जुदा
जन्नतें कहाँ, बिन हुए फना
(ज़रा सा, ज़रा सा
मुझे है गुमा सा
ज़रा सा, ज़रा सा
अभी है नशा सा
तेरे ही लिए, तुझसे हूँ जुदा
जन्नतें कहाँ, बिन हुए फना)

निखिल डी'सूजा
(ज़रा सा, ज़रा सा
राहों में धुंआ सा
तेरे ही लिए, तुझसे हूँ जुदा
जन्नतें कहाँ, बिन हुए फना)

अब एक धुंआ सा दिखता है
जो भी लिखूं मैं मिटता है
दो पल में ही
वो बातें, वो रातें, वो यादें, किसी की
छूटती ही जा रही है
टूटती ही जा रही है
वो हर कड़ी
इन साँसों को, आहों को, मेरे गुनाहों की
मिल रही है कोई सजा
जन्नतें कहाँ...

निखिल डी'सूजा
फिर  कहाँ, फिर कहाँ
खो गया, रास्ता
यूँ तो आँखों के ही सामने था
मंजिल का पता
फिर भी जाने कैसे रह गया
ये दो कदम का फासला
ये दरमियाँ, अपने दरमियाँ
जन्नतें कहाँ...
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