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चल री सजनी - Chal Ri Sajni (Mukesh)

| Thursday, December 8, 2011 |

Movie/Album: बम्बई का बाबू (1960)
Music By: एस.डी.बर्मन
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: मुकेश

चल री सजनी अब क्या सोचे
कजरा ना बह जाये रोते-रोते

बाबुल पछताए हाथों को मल के
काहे दिया परदेस टुकड़े को दिल के
आँसू लिये, सोच रहा, दूर खड़ा रे
चल री सजनी...

ममता का आँगन, गुड़ियों का कंगना
छोटी बड़ी सखियाँ, घर गली अंगना
छूट गया, छूट गया, छूट गया रे
चल री सजनी...

दुल्हन बन के गोरी खड़ी है
कोई नही अपना कैसी घड़ी है
कोई यहाँ, कोई वहाँ, कोई कहाँ रे
चल री सजनी...
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साथी न कोई मंजिल - Saathi Na Koi Manzil (Md.Rafi)

| Monday, December 5, 2011 |

Movie/Album: बम्बई का बाबू (1960)
Music By: एस.डी.बर्मन
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: मो.रफ़ी

साथी न कोई मंज़िल
दिया है न कोई महफ़िल
चला मुझे लेके ऐ दिल
अकेला कहाँ

हमदम कोई मिले कहीं
ऐसे नसीब ही नहीं
बेदर्द है ज़मीं, दूर आसमाँ
साथी न कोई मंजिल...

गलियां हैं अपने देस की
फिर भी हैं जैसे अजनबी
किसको कहे कोई, अपना यहाँ
साथी न कोई मंजिल...

पत्थर के आशना मिले
पत्थर के देवता मिले
शीशे का दिल लिये, जाऊँ कहाँ
साथी न कोई मंजिल...
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